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Wednesday, June 19, 2024

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65 वर्षीय सलीमा खान ने किया साबित “उम्र केवल एक संख्या है” जाति है स्कूल

पढ़ाई तो केवल बचपन में ही की जा सखी है,बढ़ी हुई उम्र के साथ अनपढ़ व्यक्ति पढ़ाई से कोसो दूर चला जाता है लेकिन दुनिया में कई ऐसे लोग भी है जिनके लिए पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती, वही कई लोगो के लिए ‘उम्र सिर्फ एक संख्या है’ इसको साबित करने वाले उदाहरण अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं, जिसमें 65 वर्षीय दादी ने यह साबित कर दिया है।

इससे पहले 92 साल की उम्र में प्राथमिक विद्यालय में दाखिला लेने वाली यूपी की महिला तक शामिल हैं। सलीमा खान निस्संदेह कई लोगों के लिए प्रेरणा हैं। जो शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं और जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। बुजुर्ग महिला उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के चवली प्राइमरी स्कूल की छात्रा है, जहां वह अपनी परपोती बहू के साथ व्याख्यान में भाग लेती थी।

वायरल हुए एक वीडियो में, 92 वर्षीय छात्रा को अपनी कक्षा में छोटे बच्चों के साथ बैठा हुआ देखा गया। उसे यह कहते हुए सुना गया, “मुझे पढ़ना पसंद है…मैं स्कूल जाती हूं। स्कूल की एचएम डॉ प्रतिभा शर्मा ने मीडिया को बताया कि वह बुजुर्ग महिला की सीखने और पढ़ने के प्रति लगन को देखते हुए उनके लिए पेंशन की व्यवस्था करेंगी. शर्मा ने बताया कि सलीमा अब आत्मविश्वास से 100 तक गिनती कर सकती है और अपना नाम लिख सकती है।

राज्य में नव भारत साक्षरता मिशन की जमीनी हकीकत और सफलता को प्रतिबिंबित करने के लिए सलीमा के मामले को समाचार रिपोर्टों में उद्धृत किया गया था। कथित तौर पर, 92 वर्षीय सलीमा सहित 9,000 लोगों ने इस मिशन के तहत साक्षरता परीक्षा उत्तीर्ण की।

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