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Friday, February 23, 2024

उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी दलों ने जाति आधारित जनगणना कराने की कि मांग

बिहार में हुए जाति आधारित जनगणना का असर अब पूरे देश में दिखाई देने लगा है और इसकी मांग देश के अन्य राज्यों में भी होने लगी है कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने जाति जनगणना कराने की बात कही है वही अब जाति जनगणना उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार की सहयोगी दल भी इसकी मांग करने लगे है और यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी को महंगा पड़ रहा है।

केंद्रीय मंत्री और अपना दल की महासचिव अनुप्रिया पटेल ने जहां राष्ट्रीय स्तर पर जाति आधारित जनगणना की मांग का समर्थन किया है, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की एक और सहयोगी पार्टी, निषाद पार्टी भी इसके समर्थन में आ गई है. एनडीए की नई सत्ताधारी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) पहले ही यूपी में जाति जनगणना और पिछड़ों के लिए आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग कर चुकी है। संसद में महिला आरक्षण बिल पास होने के वक्त अपना दल नेता अनुप्रिया पटेल ने भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाकर बीजेपी को असहज कर दिया था. उन्होंने महिला आरक्षण बिल में पिछड़ों के लिए अलग कोटा की मांग का समर्थन किया था. अनुप्रिया ने कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा यूपी और अखिल भारतीय स्तर पर जातीय जनगणना की मांग उठाई है.

निषाद पार्टी के मुखिया और यूपी में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने कहा है कि उनकी पार्टी शुरू से ही जातीय जनगणना के पक्ष में है. यूपी में मछुआरा समुदाय के बीच निषाद पार्टी की मजबूत पकड़ है और मौजूदा यूपी विधानसभा में उसके 11 विधायक हैं। पार्टी लंबे समय से एनडीए के साथ है और 2019 के संसद के साथ-साथ 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव भी बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ी है। डॉ. संजय निषाद ने यूपी की योगी सरकार से जातीय जनगणना कराने का अनुरोध किया है ताकि पिछड़ों की सही आबादी सामने आ सके. उन्होंने कहा कि यूपी में जातीय जनगणना जनगणना नियमावली 1961 के आधार पर होनी चाहिए जिसमें कहा गया है कि मछुआरा समुदाय की सभी उपजातियों को अनुसूचित जाति में गिना जाए.

बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एसबीएसपी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने कहा है कि उनकी पार्टी ने हमेशा इसका पक्ष लिया है और अब यूपी सरकार को इस संबंध में कदम उठाना चाहिए. यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहले ही कह चुके हैं कि वह जाति आधारित जनगणना के विचार के खिलाफ नहीं हैं। हालांकि बीजेपी की राज्य इकाई इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।

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