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Thursday, February 22, 2024

बिहार विधानसभा में नीतीश सरकार ने आरक्षण को 50% से बढ़ा कर 65% करने का रखा प्रस्ताव

विपक्ष आम चुनाव से पहले जाति आधारित जनगणना को बड़ा मुद्दा बनाने की कवायद तेज कर चुका है जब से बिहार सरकार ने जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया था तभी से भाजपा की मुश्किलें बढ़ने लगी है वहीं नीतीश कुमार ने एक और कार्ड चल दिया है जिससे बीजेपी बैकफुट पर जा सकती है।दरअसल, बिहार में जाति आधारित जनगणना की विस्तृत रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में पेश की गयी. इस मामले पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अहम बयान दिया. सीएम नीतीश ने राज्य में आरक्षण का दायरा 50% से बढ़ाकर 75% करने का प्रस्ताव रखा.

विधानसभा में चर्चा के दौरान सीएम नीतीश ने बिहार में आरक्षण कोटा 50% से बढ़ाकर 65% करने का प्रस्ताव रखा. आरक्षण को 75% तक बढ़ाने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए अतिरिक्त 10% को जोड़ने का प्रस्ताव किया गया है। सीएम नीतीश ने खुलासा किया कि सरकार आरक्षण का दायरा बढ़ाने की योजना बना रही है. वही,एससी के लिए आरक्षण अभी 16% है और इसे बढ़ाकर 20% किया जाएगा। एसटी के लिए आरक्षण, जो वर्तमान में 1% है, को बढ़ाकर 2% किया जाएगा और ईबीसी (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) और ओबीसी के लिए 43% का संयुक्त आरक्षण प्रदान किया जाएगा।

विधान सभा में प्रस्तुत जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट के महत्वपूर्ण निष्कर्ष बताते हैं कि बिहार में अनुसूचित जनजाति श्रेणी के 42.70% परिवार आर्थिक रूप से वंचित हैं, जबकि अनुसूचित जाति श्रेणी के 42.93% परिवार भी आर्थिक रूप से वंचित हैं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, राज्य की 33% आबादी स्कूल नहीं जाती थी। इससे भी अधिक उल्लेखनीय बात यह है कि राज्य में सबसे अधिक आर्थिक रूप से वंचित समूह भूमिहार समुदाय है, जिसके बाद ब्राह्मण परिवार हैं।

चर्चा के दौरान सीएम नीतीश ने कहा कि बिहार में महिलाओं की साक्षरता दर में सुधार हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर लड़कियों को शिक्षा मिलेगी तो इससे जनसंख्या नियंत्रण में मदद मिलेगी। इस बयान के दौरान विधानसभा में अजीब स्थिति देखने को मिली, जहां महिला विधायकों ने अपना असंतोष व्यक्त किया, वहीं कुछ अन्य विधायक हंसते हुए पाए गए.

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