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Thursday, June 20, 2024

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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जयप्रकाश नारायण इंटरप्रिटेशन सेंटर के मुख्य द्वार को फांद कर दी जेपी को श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने गए थे, लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस अखिलेश को रोकने के लिए परिसर का गेट बंद कर बैरिकेटिंग की थी परंतु अखिलेश यादव गेट फांद कर जेपी को श्रद्धांजलि दिया,जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है।दरअसल,अखिलेश यादव अपने समर्थकों के साथ लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जयप्रकाश नारायण इंटरप्रिटेशन सेंटर के मुख्य द्वार पर चढ़ाई की। 1975 में भारत की पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका। इससे पहले, मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया था और किसी को भी परिसर में प्रवेश करने से रोकने के लिए कथित तौर पर टिन की चादरें लगा दी गई थीं।

खबरों और तस्वीरों के मुताबिक, लोकनायक जय प्रकाश नारायण की जयंती पर प्रशासन और पुलिस ने अखिलेश यादव को भवन में प्रवेश करने से रोका. इस परिसर का निर्माण अखिलेश यादव ने 2012-17 के अपने कार्यकाल के दौरान किया था जब वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। हालाँकि, अखिलेश यादव 2017 का विधानसभा चुनाव हार गए और 2022 के राज्य चुनावों में सत्ता में लौटने में असफल रहे और इमारत अभी भी अधूरी है। हालाँकि इमारत का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इमारत के अंदर जयप्रकाश नारायण की एक मूर्ति स्थापित है। हर साल प्रतिमा पर माल्यार्पण करते है,अखिलेश यादव ने बाउंड्री पार कर छलांग लगाई, उनके साथ मौजूद कार्यकर्ता भी उनका अनुकरण करते हुए बिल्डिंग के अंदर घुस गए और जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया.

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और उनके समर्थक लोकनायक जयप्रकाश नारायण को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देने के लिए लखनऊ में जय प्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय केंद्र के मुख्य द्वार पर पहुंचे। इससे पहले, कथित तौर पर प्रवेश रोकने के लिए मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया गया था और टिन की चादरें लगा दी गई थीं। वही अखिलेश यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा,जेपी संपूर्ण क्रांति के नायक थे, सरकार हमें उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं करने देना चाहती थी और सरकार समाजवादियों की आवाज दबा रही है। मुझे रोका गया तो मुझे दीवार कूदकर अंदर आना पड़ा। मैं यहां आता हूं। और हर साल प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं, हालांकि, इस बार तैनात पुलिस ने मुझे ऐसा करने से रोक दिया।

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