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Friday, February 23, 2024

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी अधिकार देने से किया इंकार,तो वही समलैंगिक जोड़े ने अदालत के सामने की सगाई

लंबे समय से देश के कई अदालतों में समलैंगिक विवाह को कानूनी अधिकार दिलाने के मामले चल रहे है लेकिन अदालत ने LGBTQIA+ समुदाय से जुड़े फैसले को कानूनी अधिकार देने से मना कर दिया।दरअसल, एक ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई के बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को समलैंगिक विवाहों की कानूनी मान्यता पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में भारत में LGBTQIA+ समुदाय को समलैंगिक विवाह का कानूनी अधिकार देने से इनकार कर दिया।

फैसले के एक दिन बाद, जिसकी समलैंगिक समुदाय द्वारा तीखी आलोचना की जा रही है, वही अनन्या कोटिया और उत्कर्ष सक्सेना ने एक बयान देने का फैसला किया। समलैंगिक जोड़े ने सुप्रीम कोर्ट के सामने खड़े होकर अपनी सगाई की अंगूठियां एक-दूसरे को दीं। वही जानकारी के लिए बता दे की समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के 5 साल बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को निर्धारित किया कि समलैंगिक विवाह और नागरिक संघों को कानूनी मान्यता प्रदान करने का अधिकार विशेष रूप से संसद और राज्य विधानसभाओं के पास है। अदालत ने कानूनों के निर्माता के बजाय उनके व्याख्याकार के रूप में अपनी भूमिका पर जोर दिया और कहा कि विवाह से संबंधित मामले विधायी निकायों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

इस फैसले ने भारत में अनगिनत LGBTQIA+ व्यक्तियों को निराश कर दिया है, क्योंकि वे बढ़े हुए अधिकारों और स्वीकार्यता की उम्मीद कर रहे थे। इसके अतिरिक्त, अदालत ने समान-लिंग वाले जोड़ों को गोद लेने के विशेषाधिकार देने के खिलाफ विकल्प चुना, निर्णय 3-2 के मामूली बहुमत से दिया गया।

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